यदि किसी व्यक्ति को सत्य बोलने से उसके परिवार को गंभीर नुकसान हो सकता है, जबकि एक असत्य बोलने से परिवार सुरक्षित रह सकता है—तो क्या सत्य बोलना ही धर्म है?
— RAJEEV KUMAR SINGH

अजगरा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में वह सरोवर स्थित है, जो धर्मराज युधिष्ठिर और यक्ष के बीच हुए महान संवाद का साक्षी बना था।
विरासत को जानें →प्यास और शोक से व्याकुल युधिष्ठिर अपने भाइयों के मूर्छित होने के बाद जलाशय पर पहुँचे। जल ग्रहण करने से पहले एक रहस्यमय यक्ष ने उन्हें अपने प्रश्नों के उत्तर देने की चुनौती दी। इसके बाद जो हुआ, वह कोई साधारण परीक्षा नहीं थी। वह सत्य, धर्म, कर्तव्य, बुद्धि, जीवन और मनुष्य के स्वभाव पर एक ऐसा संवाद था, जो अमर हो गया।
यक्ष के प्रश्न
युधिष्ठिर का उत्तर जानिए।
प्रश्न लौट रहे हैं—हमारे और आपके बीच, ठीक वैसे ही जैसे कभी यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछे थे।
प्रतापगढ़ की 1,148 ग्राम पंचायतों और 279 शहरी वार्डों से आवाज़ें उठ रही हैं।
यह संवाद 17 विकास खंडों और 19 नगर निकायों से होकर चार ज़ोन में आगे बढ़ेगा और फिर ज़िला स्तर तक पहुँचेगा।
एक पूरे महीने तक 1,500 से अधिक बहसें होंगी। और इस असाधारण यात्रा से आठ आवाज़ें उभरकर सामने आएँगी।
फिर, 17 सितंबर 2026 को अजगरा एक बार फिर मंच बनेगा।
उत्तर से आज का युधिष्ठिर ढूँढा जाएगा, प्रश्नों और यक्ष की खोज भी ज़रूरी है। अजगरा में कभी प्रश्न सत्य, धर्म, कर्तव्य, ज्ञान और मानव स्वभाव को परखने का माध्यम बने थे। आज का यक्ष उसी भावना का सम्मान करता है—और लोगों को अपने समय के वे प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित करता है जो उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
अपना यक्ष प्रश्न भेजें→अजगरा से
सैकड़ों प्रश्नों में से चुने गए 25 प्रश्न—पाँच विषयों में।
यदि किसी व्यक्ति को सत्य बोलने से उसके परिवार को गंभीर नुकसान हो सकता है, जबकि एक असत्य बोलने से परिवार सुरक्षित रह सकता है—तो क्या सत्य बोलना ही धर्म है?
— RAJEEV KUMAR SINGH
क्या कोई कार्य कानूनी होते हुए भी अनैतिक हो सकता है?
— ABHISHEK TIWARI
यदि सत्य बोलने से किसी निर्दोष का जीवन टूट जाए, लेकिन झूठ बोलने से उसकी रक्षा हो—तो मनुष्य का धर्म क्या है: सत्य के प्रति निष्ठा या करुणा?
— SARIKA SHUKLA
क्या किसी निर्णय की नैतिकता उसके परिणाम से तय होती है, या उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिए गए विवेक से?
— RAJEEV KUMAR SINGH
जब सामने वाला अधर्म कर रहा हो, तब क्या केवल क्षमा और धैर्य रखना धर्म है, या कभी उसके विरुद्ध कठोर होना भी धर्म बन जाता है?
— RAJEEV KUMAR SINGH
न्याय और कानून में क्या अंतर है? और जब व्यवस्था का “कानून” ही लोगों को “न्याय” देना बंद कर दे, तो उस स्थिति में एक आम मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म क्या है?
— HEMANT HARRAIPATTI
क्या बिना दूसरे की स्वतंत्रता का हनन किए, वास्तविक स्वतंत्रता को प्राप्त किया जा सकता है?
— RAJENDRA SINGH
यदि किसी निर्णय का परिणाम अच्छा हो, लेकिन उस निर्णय तक पहुँचने का मार्ग अन्यायपूर्ण हो—तो इतिहास उसे धर्म कहेगा या अधर्म?
— SARIKA SHUKLA
महाभारत में दानवीर कर्ण की दुर्योधन के प्रति निष्ठा के लिए सम्मान किया जाता है, किंतु गलत काम में साथ देने वाला दोषी भी माना जाता है। क्या न्याय के विरुद्ध खड़ी निष्ठा को फिर भी गुण माना जा सकता है?
— PRABHAKAR SINGH
क्या ऐसा कोई विकास संभव है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना भेदभाव के पहुँच सकता है?
— SHASHANK PANDEY
मनुष्य की सबसे बड़ी जीत क्या है—दुनिया को जीतना, दूसरों को हराना या स्वयं पर विजय पाना?
— ABHISHEK KUMAR PANDEY
यदि किसी व्यक्ति को जीवन में सुख और सफलता में से केवल एक को चुनना पड़े, तो उसे क्या चुनना चाहिए—और क्यों?
— RAJEEV KUMAR SINGH
मनुष्य के लिए सबसे कठिन क्या है—सत्य को जानना, सत्य को स्वीकार करना, या सत्य के अनुसार जीवन जीना? और यदि तीनों में से केवल एक चुनना हो, तो क्यों?
— ABHI SINGH
जिस संसार को मनुष्य बदलना चाहता है, क्या उसने कभी स्वयं को बदलने का साहस किया है?
— ABHISHEK YADAV
यदि अतीत को सुधारने की शक्ति आपके पास हो, लेकिन उसे बदलने की कीमत आज के “आप” को खोना हो, तो क्या अतीत को सुधारना वास्तव में सुधार कहलाएगा?
— PRAVEEN SINGH
वैज्ञानिक सिद्धांत हजारों प्रयोगों में सफल होता है, फिर भी वैज्ञानिक उसे अंतिम सत्य नहीं मानते। विज्ञान सफलता के बाद भी निश्चितता से क्यों बचता है?
— DEEPA SINGH
AI किसी प्रश्न का उत्तर देती है, लेकिन उसकी सत्यता जाँचने के लिए मनुष्य के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं। क्या अत्यधिक बुद्धिमान स्रोत पर विश्वास करना और अंधविश्वास में कोई मूलभूत अंतर है?
— DEVESH SINGH
जब आपके विचार, आपकी पसंद और आपके निर्णय एल्गोरिदम और सोशल मीडिया द्वारा तय किए जा रहे हों, तो क्या आप वास्तव में एक स्वतंत्र इंसान हैं, या किसी अदृश्य पिंजरे के आधुनिक गुलाम?
— HEMANT HARRAIPATTI
शिक्षा का क्या उद्देश्य है? क्या शिक्षित वही है जो नौकरी पा गया हो?
— ABHISHEK SINGH
आज का मनुष्य अधिक जानकारी, सुविधाओं और संवाद के साधनों के बावजूद समझ, धैर्य और संतुष्टि में कमी क्यों महसूस करता है?
— SHIVENDRA PRATAP SINGH
जब पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं, तो फिर हम अपनी ही जीवनदायिनी माता के साथ अन्याय क्यों कर रहे हैं?
— AJAY KRANTIKARI
क्या पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच का टकराव केवल एक नीतिगत मुद्दा है, या यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है?
— SHIVENDRA PRATAP SINGH
क्या मनुष्य विकास की परिभाषा बदले बिना जलवायु परिवर्तन के विनाश को रोक सकता है?
— SHASHANK PANDEY
क्या वर्तमान पीढ़ी के विकास का अधिकार इतना बड़ा है कि वह आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को खतरे में डाल दे?
— SHIVANSH GUPTA
मान लीजिए आपके पास ₹1 लाख हैं। आज 10 गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद करें या ऐसा व्यवसाय शुरू करें जिससे पाँच वर्षों में 50 बच्चों की सहायता हो सके—आप क्या चुनेंगे, और यदि व्यवसाय असफल हो गया तो?
— RAJEEV KUMAR SINGH
अजगरा की यात्रा हमारे लिए, हमारे द्वारा तय की गई है।














1,427→36→16→8
1,500 से अधिक बहसें। हज़ारों लोग। अजगरा की ओर एक यात्रा।
प्रश्न जारी हैं।
AJGARA · 17 SEPTEMBER 2026